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Saturday, August 28, 2010

ज़रा

तुझसे ही मकसद और तुझसे ही उम्मीद इस ज़िन्दगी की,
दुनिया भूले तो परवाह नहीं,तू ना याद करे तो जीने का फायदा ही क्या |

तेरे बिना यह मुस्कुराहट है झूठी,

आँखों की रौशनी भी हुई फीकी |

मुझे अपने में समा के तो देख ज़रा ,

मै भी खिल जाओ रंगों से ,हो जाए यह समा भी रंगीन ज़रा ..

इन्द्रधनुष सी लगे यह दुनिया सारी

जब देखू तेरी आँखों से ..

मेरी आँखों में भर के तो देख सपनो के रंग ज़रा ..