बहुत चाहा कि उसे न चाहे,
पर उसकी याद है कि जाती नहीं।
तन्हाई में भी मुझे तन्हा छोड़ती नहीं,
दिल से दिमाग तक उसकी तरंग जाती नहीं।
दिल अब किसी को चाह कर भी नहीं चाहता,
क्यूंकि दिल उसको भूलना नहीं चाहता।
पर उसको पाना है शायद नामुमकिन,
जीना हो गया है मुश्किल उसके बिन।
वो खत्म न होने वाली ख़ुद से ख़ुद की बातें,
उसकी कमी को और बढाती है लम्बी रातें।
कितनी बार की ख़ुद से लडाई,
पर हर बार आंसुओ में ही तमन्ना बहाई।
उसकी आँखें देखूं तो दुनिया भूल जाता हूँ,
पर वो नहीं है मेरी सोच कर ही होश में आता हूँ।
क्यूँ किसी को दिल से मिटाना होता है मुश्किल,
कभी हमने नहीं सोचा था हालत होगी अपनी ऐसी,
नज़रो के सामने वो सदा तैरती रहती है,
उसके एहसास की खुशबू मेरे चारो और महकती रहती है।
सुना करते थे हम दीवानों की कहानियाँ,
मैं एक कहानी न बन जाओ......मुझे ऐसी इनायत बख्श मेरे खुदा।
ऐ खुदा मुझ पर रहम कर ,
मेरे ज़ख्मो का इलाज़ कर.
sahi hai bhai lage raho.......
ReplyDeletebut ye hai kaun jiske khayalo mei khoye ho.... :)
kiddin....nice poem...
hai koi jo ek khayal ban kar rah gayi hai Rahul bhai..Thanks for complement.
ReplyDeleteyar tu to pagal ho gya hai kisi ke pyar me..............
ReplyDeleteBuss tum hi samajh sakti ho Punit mere dil ka haal.
ReplyDeleteWah Dude....kya chaha hai....manna padega :)
ReplyDeleteits really good
ReplyDeletegood
ReplyDeleteThanks Saritaji ..
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