नज़र तुम्हारी कुछ कहने को बेताब सी दिखती है,
शायद दिल की बात तुम्हारी जुबां पर आने से डरती है.
पर कहदो उन अरमानो को,
समझा दो उन एहसासों को,
एक बार खुले आसमान में उड़ कर तो देखे,
खुली हवा में सांस लेकर तो देखे.
न जाने कब से कोई तुम्हारे इंतज़ार में बैठा है,
तुम्हारे दिल की आवाज़ सुनने को बेक़रार बैठा है.
वादा है की तुम मायूस न होंगे,
कभी न भूल पायोगे वोह मदहोश झोंके,
बस इक बार दिल-ऐ-इज़हार करके तो देखो.
This is the best one so far..love it truly..:)
ReplyDeleteThanks Dhara ji for your appreciating words.
ReplyDeleteBahut achi hai..I was unaware that u have ur own site also..keep it up..
ReplyDeleteThanks Brajesh for your encouraging comments.
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