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Sunday, July 3, 2011

कशिश

काश! कशिश हममे इतनी होती,

याद तुम्हे हम करते और तुम सामने होती.


काश! कशिश हममे इतनी होती,

सिर्फ सपनो में ही मुलाकात न होती.


ख्याल, जब भी तुम्हारा आता,

चारो और ख़ुशी का माहौल छाता.


ख्याल, जब भी तुम्हारा आता,

सिर्फ तुमको ही सामने पाता.


दूर तक ढूंढता तुमको,

नज़र का ही ख्याल है हमको.


नज़र जो सिर्फ तुमको देखना चाहती है,

दिल में एक तस्वीर खीचना चाहती है.


हमारी बेचैनी को तुम भी महसूस कर पाती,

काश! कशिश हममे इतनी होती,

आखें तुम्हारी और नज़र हमारी होती.

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